Āraṇyaka Parva, Adhyāya 233 — Pandavas Mobilize; Arjuna’s Conciliation and the Onset of Combat
धनमायुर्यशो दीप्त॑ पुत्राउछत्रुजयं तथा । स पुष्टितुष्टी सम्प्राप्प स्कन्दसालोक्यमाप्नुयात्,जो ब्राह्मण एकाग्रचित्त हो स्कन्ददेवके इस जन्म-वृत्तान्तको पढ़ता है, ब्राह्मणोंको सुनाता है अथवा स्वयं ब्राह्मणके मुखसे सुनता है, वह धन, आयु, उज्ज्वल यश, पुत्र, शत्रुविजय तथा तुष्टि-पुष्टि पाकर अन्तमें स्कन्दके लोकमें जाता है
dhanam āyur yaśo dīptaṁ putrān śatrūjayaṁ tathā | sa puṣṭi-tuṣṭī samprāpya skanda-sālokyam āpnuyāt ||
वह धन, आयु, दीप्त यश, पुत्र, शत्रुविजय तथा तुष्टि-पुष्टि प्राप्त करके अंत में स्कन्द के लोक को प्राप्त होता है।
मार्कण्डेय उवाच