श्रीजुष्ट: पठचमीं स्कन्दस्तस्माच्छीपज्चमी स्मृता । षष्ठ्यां कृतार्थो5भूद् यस्मात् तस्मात् षष्ठी महातिथि:,पंचमी तिथिको स्कन्ददेव श्री अर्थात् शोभासे सेवित हुए, इसलिये उस तिथिको श्रीपड्चमी कहते हैं और षष्ठीको कृतार्थ हुए थे, इसलिये षप्ठी महातिथि मानी गयी
स्कन्ददेव पंचमी तिथि को श्री—अर्थात् शोभा—से युक्त हुए; इसलिए वह तिथि ‘श्रीपंचमी’ कही गई। और षष्ठी को वे कृतार्थ हुए; इसलिए षष्ठी ‘महातिथि’ मानी गई।
मार्कण्डेय उवाच