Karṇa’s Counsel on Śrī
Fortune) and the Proposed Display before the Exiled Pāṇḍavas (कर्णवचनम् / श्रीप्रदर्शन-प्रस्तावः
न्यस्तं यत् त्रिपुरघ्नेन सुरारिविनिकृन्तनम् । तद् गृहीत्वा धनु: श्रेष्ठ ननाद बलवांस्तदा,त्रिपुरनाशक भगवान् शिवने देवशत्रुओंका विनाश करनेवाले जिस विशाल तथा रोमाज्चकारी श्रेष्ठ धनुषको रख छोड़ा था उसे बलवान् स्कन्दने उठा लिया और बड़े जोरसे गर्जना की
त्रिपुरघ्न भगवान् द्वारा जो देवशत्रुओं का छेदन करने वाला श्रेष्ठ धनुष रख छोड़ा गया था, उसे उठाकर बलवान् (स्कन्द) ने तब प्रचण्ड गर्जना की।
मार्कण्डेय उवाच