Kaurava Court Hears of the Pāṇḍavas’ Forest Hardship (वैचित्रवीर्यवंशीयस्य राज्ञः करुणाविचारः)
“जान पड़ता है, इस समय चन्द्रमा जिस पुत्रको जन्म देंगे, वही इस देवीका पति होगा अथवा अग्नि भी इन सभी अभीष्ट गुणोंसे युक्त हैं। वे भी देवकोटियें ही हैं ।। एष चेज्जनयेद् गर्भ सो<स्या देव्या: पतिर्भवेत् । एवं संचिन्त्य भगवान् ब्रह्मलोक॑ तदा गतः,“अत: ये यदि किसी बालकको उत्पन्न करें तो वही इस देवीका पति होगा।” ऐसा सोच- विचारकर ऐश्वर्यशाली इन्द्र उस समय उस देवसेनाको साथ ले ब्रह्मलोकमें गये और ब्रह्माजीसे इस प्रकार बोले--'भगवन्! आप इस देवीके लिये कोई अच्छे स्वभावका शूरवीर पति प्रदान कीजिये”
eṣa cej janayed garbhaḥ so 'syā devyāḥ patir bhavet | evaṃ saṃcintya bhagavān brahmalokaṃ tadā gataḥ |
मार्कण्डेय बोले— “यदि यह गर्भ उत्पन्न करे, तो वही गर्भज पुत्र इस देवी का पति होगा।” ऐसा विचार कर ऐश्वर्यशाली शतक्रतु इन्द्र देवसेना को साथ लेकर ब्रह्मलोक गये और ब्रह्मा से बोले— “भगवन्! इस देवी के लिये सदाचारयुक्त, शूरवीर पति प्रदान कीजिये।”
मार्कण्डेय उवाच