Skanda-janma: Śivā/Svāhā, Agni, and the Manifestation of Guha
Mahābhārata 3.214
प्रयत्ने कर्मणि बले स एपष त्रिषु वर्तते । उदानमिति त॑ प्राहुरध्यात्मविदुषो जना:,वही प्राण जब प्रयत्न (काम करनेकी चेष्टा), कर्म (उत्क्षेपषण और गमन आदि) तथा बल (बोझ उठानेकी शक्ति)--इन तीन विषयोंमें प्रवृत्त होता है, तब अध्यात्मवेत्ता मनुष्य उसे उदान कहते हैं
वही प्राण जब प्रयत्न, कर्म और बल—इन तीनों में प्रवृत्त होता है, तब अध्यात्मवेत्ता उसे ‘उदान’ कहते हैं।
व्याध उवाच