Vyādha–Brāhmaṇa Saṃvāda: Śāpa, Vṛtta-Dharma, and Counsel Against Viṣāda
Grief
संशयं परम॑ प्राप्प वेदनामतुलामपि,“भगवन्! अपनेको भारी प्राणसंकटमें डालकर और अतुल वेदनाको सहकर नारियाँ बड़े कष्टसे संतान उत्पन्न करती हैं! विप्रवर! फिर बड़े स्नेहले उनका पालन भी करती हैं
saṁśayaṁ paramaṁ prāpya vedanām atulām api | “bhagavan! aneko bhārī prāṇa-saṅkaṭeṁ ḍālkar aur atul vedanā ko sahkar nāriyāṁ baṛe kaṣṭ se santān utpanna kartī haiṁ; vipravara! phir baṛe sneh se unakā pālan bhī kartī haiṁ.”
अत्यन्त संशय में पड़कर (मन में यह विचार उठता है)—“भगवन्! स्त्रियाँ अपने को भारी प्राण-संकट में डालकर और अतुल वेदना सहकर बड़े कष्ट से संतान उत्पन्न करती हैं; और फिर, हे विप्रवर, बड़े स्नेह से उनका पालन-पोषण भी करती हैं।”
वैशम्पायन उवाच