Śālva–Pradyumna Yuddha: Sārathya-kauśala, Astra-pratikāra, Daiva-niyati
Chapter 20
न हया न रथो वीर न यन्ता मम दारुक: । अदृश्यन्त शरैश्छन्नास्तथाहं सैनिकाश्न मे,वीरवर! उस समय मेरे घोड़े, रथ, मेरा सारथि दारुक, मैं तथा मेरे सारे सैनिक--सभी बाणोंसे आच्छादित होकर अदृश्य हो गये
na hayā na ratho vīra na yantā mama dārukaḥ | adṛśyanta śaraiś channās tathāhaṃ sainikāś ca me vīravara ||
वीरवर! उस समय न मेरे घोड़े दिखते थे, न रथ, न मेरा सारथि दारुक; और मैं भी तथा मेरे सारे सैनिक भी बाणों से आच्छादित होकर अदृश्य हो गए।
वासुदेव उवाच