Kuvalāśva’s Lineage and Uttaṅka’s Petition concerning Dhundhu (धुन्धु-प्रसङ्गः)
राजपुत्र्युवाच यथा युक्ता वामदेवाहमेनं दिने दिने संदिशन्ती नृशंसम् | ब्राह्मणेभ्यो मृगयती सूनृतानि तथा ब्रद्यान् पुण्यलोक॑ लभेयम्,राजपुत्री बोली--वामदेवजी! मैं इन कठोर स्वभाववाले अपने स्वामीको प्रतिदिन सावधान रहकर मीठे वचन बोलनेकी सलाह देती रहती हूँ और स्वयं ब्राह्मणोंकी सेवाका अवसर ढूँढ़ती हूँ। ब्रह्म! इन सत्कर्मोंके कारण मुझे पुण्यलोककी प्राप्ति हो
rājaputry uvāca | yathā yuktā vāmadeva aham enaṃ dine dine saṃdiśantī nṛśaṃsam | brāhmaṇebhyo mṛgayatī sūnṛtāni tathā brūyāṃ puṇyalokaṃ labheyam ||
राजकुमारी बोली—वामदेव! यथोचित मैं प्रतिदिन सावधानी से अपने इस कठोर-स्वभाव पति को समझाती रहती हूँ कि वह मधुर और सत्य वचन बोले। मैं ब्राह्मणों की सेवा के अवसर भी खोजती रहती हूँ। इन पुण्यकर्मों से मुझे पुण्यलोक की प्राप्ति हो।
वामदेव उवाच