Kuvalāśva’s Lineage and Uttaṅka’s Petition concerning Dhundhu (धुन्धु-प्रसङ्गः)
एवं ब्रुवन्नेव स यातुधानै- हतो जगामाशु महीं क्षितीश: । ततो विदित्वा नृपतिं निपातित- मिक्ष्वाकवो वै दलमभ्यषिज्चन्,ऐसा कहते ही राजा शल उन राक्षसोंसे मारे जाकर तुरंत धराशायी हो गये। इक्ष्वाकुवंशी क्षत्रियोंकोी जब यह मालूम हुआ कि राजा मार गिराये गये, तब उन्होंने उनके छोटे भाई दलका राज्याभिषेक कर दिया
evaṁ bruvann eva sa yātudhānaiḥ hato jagāmāśu mahīṁ kṣitīśaḥ | tato viditvā nṛpatiṁ nipātitam ikṣvākavo vai dalam abhyasiñcan |
ऐसा कहते-कहते ही पृथ्वीपति राजा उन राक्षसों द्वारा मारा गया और शीघ्र ही धरती पर गिर पड़ा। तब इक्ष्वाकुवंशी क्षत्रियों ने अपने नरेश के गिराए जाने का समाचार पाकर उसके छोटे भाई दल का राज्याभिषेक कर उसे सिंहासन पर स्थापित किया।
मार्कण्डेय उवाच