इन्द्रद्युम्नोपाख्यानम्
Indradyumna Upākhyāna: On Kīrti, Smṛti, and Restoration
कल्की विष्णुयशा नाम द्विज: कालप्रचोदित: । उत्पत्स्यते महावीर्यों महाबुद्धिपराक्रम:,सम्भूत: सम्भलग्रामे ब्राह्मणावसथे शुभे । (महात्मा वृत्तसम्पन्न: प्रजानां हितकृन्नूप ।) राजन! युगान्तके समय कालकी प्रेरणासे सम्भल नामक ग्राममें किसी ब्राह्मणके मंगलमय गृहमें एक महान् शक्तिशाली बालक प्रकट होगा, जिसका नाम होगा विष्णुयशा कलल््की। वह महान् बुद्धि एवं पराक्रमसे सम्पन्न महात्मा, सदाचारी तथा प्रजावर्गका हितैषी होगा। (वह बालक ही भगवान्का कल्की अवतार कहलायेगा)
kalkī viṣṇuyaśā nāma dvijaḥ kālapracoditaḥ | utpatsyate mahāvīryo mahābuddhiparākramaḥ, sambhūtaḥ sambhalagrāme brāhmaṇāvasathe śubhe | (mahātmā vṛttasampannaḥ prajānāṃ hitakṛn nṛpa |)
मार्कण्डेय ने कहा—काल की प्रेरणा से विष्णुयशा नामक द्विज—कल्कि—उत्पन्न होगा, जो महावीर्य, महाबुद्धि और पराक्रम से सम्पन्न होगा। वह सम्भल नामक ग्राम में किसी ब्राह्मण के शुभ गृह में प्रकट होगा। हे राजन्, वह महात्मा सदाचार से युक्त और प्रजाजन के हित में तत्पर होगा।
मार्कण्डेय उवाच