इन्द्रद्युम्नोपाख्यानम्
Indradyumna Upākhyāna: On Kīrti, Smṛti, and Restoration
मही म्लेच्छजनाकीर्णा भविष्यति ततो<5चिरात् । करभारभयाद् विप्रा भजिष्यन्ति दिशो दश,सारी पृथ्वी थोड़े ही समयमें म्लेच्छोंसे भर जायगी। ब्राह्मणलोग करोंके भारसे भयभीत होकर दसों दिशाओंकी शरण लेंगे
māhī mlecchajanākīrṇā bhaviṣyati tato 'cirāt | karabhārabhayād viprā bhajiṣyanti diśo daśa ||
थोड़े ही समय में सारी पृथ्वी म्लेच्छों से भर जाएगी। करों के भारी बोझ के भय से ब्राह्मण लोग अपने घर छोड़कर दसों दिशाओं में शरण लेने लगेंगे।
मार्कण्डेय उवाच