कृतयुगवर्णनम् तथा राजधर्मोपदेशः
Kṛtayuga Description and Instruction on Royal Dharma
तपसा चिन्तयंश्वापि तं शिशुं नोपलक्षये । भूतं भव्यं भविष्यं च जानन्नपि नराधिप,नरेश्वर! मैं भूत, भविष्य और वर्तमान तीनों कालोंका ज्ञाता होनेपर भी तपस्यासे भलीभाँति चिन्तन करता (ध्यान लगाता) रहा, तो भी उस शिशुके विषयमें कुछ न जान सका
tapasā cintayaṁś cāpi taṁ śiśuṁ nopalakṣaye | bhūtaṁ bhavyaṁ bhaviṣyaṁ ca jānann api narādhipa, nareśvara |
हे नराधिप! तपस्या करके ध्यान लगाता रहा, तो भी उस शिशु के विषय में मैं कुछ भी न जान सका; भूत, वर्तमान और भविष्य—तीनों कालों का ज्ञाता होकर भी।
वैशम्पायन उवाच