कृतयुगवर्णनम् तथा राजधर्मोपदेशः
Kṛtayuga Description and Instruction on Royal Dharma
ततस्ते जलदा घोरा राविण: पुरुषर्षभ । सर्वतः प्लावयन्त्याशु चोदिता: परमेछ्िना,पुरुषरत्न! तदनन्तर विधातासे प्रेरित हो गर्जन-तर्जन करनेवाले वे भयंकर मेघ शीघ्र सब ओर वर्षा करके सबको जलसे आप्लावित कर देते हैं
tataste jaladā ghorā rāviṇaḥ puruṣarṣabha | sarvataḥ plāvayantyāśu coditāḥ parameśṭhinā ||
तब, पुरुषश्रेष्ठ, वे भयंकर गर्जन-तर्जन करने वाले मेघ—विधाता की प्रेरणा से—शीघ्र ही सब ओर वर्षा करके सबको जल से आप्लावित कर देते हैं।
वैशम्पायन उवाच