कृतयुगवर्णनम् तथा राजधर्मोपदेशः
Kṛtayuga Description and Instruction on Royal Dharma
ततो योजनविंशानां सहस्राणि शतानि च । निर्दहत्यशिवो वायु: स च संवर्तकोडनल:,इसके बाद वह अमंगलकारी प्रचण्ड वायु और वह संवर्तक अग्नि बाईस हजार योजन तकके लोगोंको भस्म कर डालती है
tato yojanaviṁśānāṁ sahasrāṇi śatāni ca | nirdahaty aśivo vāyuḥ sa ca saṁvartako 'nalaḥ ||
इसके बाद अमंगलकारी प्रचण्ड वायु उठती है और उसके साथ संवर्तक अग्नि; वे दोनों मिलकर बाईस हजार योजन तक के प्रदेश को भस्म कर डालते हैं।
वैशम्पायन उवाच