Shloka 63

विपरीतास्तदा नार्यो वज्चयित्वारहत: पतीन्‌ | व्युच्चरन्त्यपि दुःशीला दासै: पशुभिरेव च,उस समयकी विपरीत स्वभाववाली स्त्रियाँ अपने योग्य पतियोंको भी धोखा देकर बुरे शील-स्वभावकी हो जायँगी और सेवकों तथा पशुओंके साथ भी व्यभिचार करेंगी

वैशम्पायन बोले—उस समय विपरीत स्वभाववाली स्त्रियाँ अपने योग्य पतियों को भी छलकर दुश्शीला हो जाएँगी और दासों तथा पशुओं के साथ भी व्यभिचार करेंगी।

वैशम्पायन उवाच