कृतयुगवर्णनम् तथा राजधर्मोपदेशः
Kṛtayuga Description and Instruction on Royal Dharma
आश्रमेषु वृथाचारा: पानपा गुरुतल्पगा: । इह लौकिकमीहन्ते मांसशोणितवर्धनम्
āśrameṣu vṛthācārāḥ pānapā gurutalpāgāḥ | iha laukikam īhante māṃsaśoṇitavardhanam ||
वैशम्पायन बोले—आश्रमों में भी कुछ ऐसे होंगे जिनका आचार खोखला होगा—मद्यपान करनेवाले और गुरु की शय्या का उल्लंघन करनेवाले। वे यहाँ केवल लौकिक लाभ ही चाहेंगे, अपने मांस और रक्त की वृद्धि को ही साध्य मानेंगे।
वैशम्पायन उवाच