कृतयुगवर्णनम् तथा राजधर्मोपदेशः
Kṛtayuga Description and Instruction on Royal Dharma
सहस्रमेकं वर्षाणां तत: कलियुगं स्मृतम्,तदनन्तर एक हजार दिव्य वर्ष कलियुगका मान कहा गया है, सौ वर्ष उसकी संध्याके और सौ वर्ष संध्यांशके बताये गये हैं (इस प्रकार कलियुग बारह सौ दिव्य वर्षोंका होता है)। संध्या और संध्यांशका मान बराबर-बराबर ही समझो
sahasram ekaṁ varṣāṇāṁ tataḥ kaliyugaṁ smṛtam | tad-anu sandhyā-śataṁ proktaṁ sandhyāṁśa-śatam eva ca | evaṁ kaliyugaṁ dvādaśa-śataṁ divya-varṣāṇām | sandhyā-sandhyāṁśayoḥ pramāṇaṁ samam eva viduḥ ||
वैशम्पायन बोले—इसके बाद कलियुग का मान एक हजार दिव्य वर्ष कहा गया है। उसके पश्चात् सौ वर्ष उसकी संध्या और सौ वर्ष संध्यांश बताए गए हैं। इस प्रकार कलियुग कुल बारह सौ दिव्य वर्षों का होता है; संध्या और संध्यांश का मान समान ही समझो।
वैशम्पायन उवाच