कृतयुगवर्णनम् तथा राजधर्मोपदेशः
Kṛtayuga Description and Instruction on Royal Dharma
आदितो मनुजव्याप्र कृत्स्नस्य जगत: क्षये । ये अन्तर्यामी आत्मा होनेसे सबको जानते हैं, परंतु इन्हें वेद भी नहीं जानते। नृपशिरोमणे! नरश्रेष्ठ! सम्पूर्ण जगत्का प्रलय होनेके पश्चात् इन आदिभूत परमेश्वरसे ही यह सम्पूर्ण आश्वर्यमय जगत् पुनः उत्पन्न हो जाता है
हे मनुजव्याघ्र! सम्पूर्ण जगत् के क्षय के आदि से ही वह अन्तर्यामी परमात्मा सबको जानता है, परन्तु उसे वेद भी नहीं जान पाते। हे नृपशिरोमणे, नरश्रेष्ठ! सम्पूर्ण जगत् का प्रलय हो जाने पर उसी आदिभूत परमेश्वर से यह समस्त आश्चर्यमय जगत् फिर से उत्पन्न हो उठता है।
वैशम्पायन उवाच