कृतयुगवर्णनम् तथा राजधर्मोपदेशः
Kṛtayuga Description and Instruction on Royal Dharma
किमर्थ च जगत् सर्व शरीरस्थं तवानघ । कियन्तं च त्वया कालमिह स्थेयमरिंदम,“अनघ! यह सारा संसार आपके शरीरमें किसलिये स्थित है? शत्रुदमन! आप कितने समयतक यहाँ इस रूपमें रहेंगे?
kimarthaṃ ca jagat sarvaṃ śarīrasthaṃ tavānagha | kiyantaṃ ca tvayā kālam iha stheyam ariṃdama ||
अनघ! यह सारा संसार आपके शरीर में किस प्रयोजन से स्थित है? और शत्रुदमन! आप इस प्रकट रूप में यहाँ कितने समय तक रहेंगे?
वैशम्पायन उवाच