अशुभै: कर्मभि: पापास्तिर्यड्निरयगामिन: । संसारेषु विचित्रेषु पच्यमाना: पुनःपुन:,वे पापपरायण हो अपने अशुभ कर्मोंके फलस्वरूप पशु-पक्षी आदिकी योनियोंमें जाने और नरकमें गिरने लगे। विचित्र सांसारिक योनियोंमें बारंबार जन्म लेकर दुःखसे संतप्त होने लगे
वे पापपरायण होकर अपने अशुभ कर्मों के फल से तिर्यक्-योनियों में जाने लगे और नरक में भी गिरने लगे। विचित्र संसार-योनियों में बार-बार जन्म लेकर वे पुनःपुनः दुःख से तप्त होने लगे।
मार्कण्डेय उवाच