Kailāsa-darśana, Badarī-vāsa, and Sarasvatī–Dvaitavana Transition (कैलासदर्शन–बदरीवास–सरस्वतीद्वैतवनगमनम्)
अब्रवीद् विबुधै: सार्थमिदं स मधुरं वच: अतिदेवासुरं कर्म कृतमेव त्वया रणे,हिरण्यपुरका विध्वंस, दानवी मायाका निवारण तथा महाबलवान् निवातकवचोंका युद्धमें वध सुनकर मरुत् आदि देवताओंसहित भगवान् सहस्नलोचन इन्द्र अत्यन्त प्रसन्न हो मुझे साधुवाद देने लगे और मुझे प्रेम पूर्वक हृदयसे लगाकर मुसकराते हुए मेरा मस्तक सूँघा। तत्पश्चात् देवराजने बार-बार मुझे सान्त्वना देते हुए देवताओंके साथ यह मधुर वचन कहा--'पार्थ! तुमने युद्धमें वह कार्य किया है, जो देवताओं और असुरोंके लिये भी असम्भव है
arjuna uvāca | abravīd vibudhaiḥ sārtham idaṃ sa madhuraṃ vacaḥ | atidevāsuraṃ karma kṛtam eva tvayā raṇe | hiraṇyapurakā-vidhvaṃsaḥ dānavī-māyā-nivāraṇaṃ tathā mahābalavān nivātakavacānāṃ yuddhe vadhaṃ śrutvā marud-ādi-devatābhiḥ saha bhagavān sahasra-locana indraḥ atyantaṃ prasannaḥ san māṃ sādhuvādaṃ dadau | sa ca māṃ premṇā hṛdayena pariṣvajya smayamānaḥ mama mastakaṃ ghrātvā | tataḥ paścāt devarājaḥ punaḥ punaḥ māṃ sāntvayann devaiḥ saha idaṃ madhuraṃ vacaḥ abravīt— “pārtha! tvayā yuddhe tat karma kṛtaṃ yat devāsurair api aśakyaṃ” |
तब हर्षित हृदय इन्द्र ने मरुतों और अन्य देवताओं के साथ यह मधुर वचन कहा— “तुमने रण में देवों और असुरों से भी बढ़कर अद्भुत कर्म किया है।” हिरण्यपुर के विध्वंस, दानवों की माया के निवारण और महाबली निवातकवचों के युद्ध में वध का समाचार सुनकर उन्होंने मेरी प्रशंसा की, प्रेम से आलिंगन किया, मुसकराते हुए मेरे मस्तक पर स्नेहपूर्वक हाथ रखा। फिर देवराज ने देवताओं के बीच बार-बार मुझे आश्वस्त करते हुए कहा— “पार्थ, तुम्हारा यह कर्म देवों और असुरों की सामर्थ्य से भी परे है।”
अजुन उवाच