Kailāsa-darśana, Badarī-vāsa, and Sarasvatī–Dvaitavana Transition (कैलासदर्शन–बदरीवास–सरस्वतीद्वैतवनगमनम्)
अन्तर्भूमौ निपतति पुनरूर्ध्व॑ प्रतिष्ठते पुनस्तिर्यक् प्रयात्याशु पुनरप्सु निमज्जति,वह दिव्य पुर कभी पृथ्वीपर अथवा पातालमें चला जाता, कभी ऊपर उड़ जाता, कभी तिरछी दिशाओंमें चलता और कभी शीघ्र ही जलमें डूब जाता था
antarbhūmau nipatati punar ūrdhvaṁ pratiṣṭhate punaḥ tiryak prayāty āśu punar apsu nimajjati
अर्जुन बोले—वह दिव्य पुर कभी पृथ्वी के भीतर जा गिरता, कभी फिर ऊपर उठ खड़ा होता; कभी तिरछी दिशाओं में वेग से चलता और कभी शीघ्र ही जल में डूब जाता था।
अजुन उवाच