Divyāstrāṇāṃ Pradarśana-nivāraṇa
Display of Divine Weapons and Its Prohibition
तमसा संवृते लोके घोरेण परुषेण च । हरयो विमुखाश्चासन् प्रास्खलच्चापि मातलि:,घोर एवं दुःसह तिमिरराशिसे सम्पूर्ण लोकोंके आच्छादित हो जानेपर मेरे रथके घोड़े युद्धसे विमुख हो गये और मातलि भी लड़खड़ाने लगे
arjuna uvāca | tamasā saṁvṛte loke ghoreṇa paruṣeṇa ca | harayo vimukhāś cāsan prāskhalac cāpi mātaliḥ ||
जब घोर और कठोर अन्धकार से सारा लोक आच्छादित हो गया, तब मेरे रथ के घोड़े युद्ध से विमुख हो गए और मातलि भी लड़खड़ाने लगे।
अजुन उवाच