इन्द्रप्रशंसा, दिव्योपकरणदानं, गन्धमादनसमागमश्च
Indra’s Commendation, Bestowal of Divine Insignia, and the Gandhamādana Reunion
आच्छाद्य रथपन्थानमुत्क्रोशन्तो महारथा: । आवृत्य सर्वतस्ते मां शरवर्षरवाकिरन्,उन महारथी दानवोंने मेरे रथका मार्ग रोककर भीषण गर्जना करते हुए मुझे सब ओरसे घेर लिया और मुझपर बाणोंकी वर्षा आरम्भ कर दी। फिर कुछ अन्य महापराक्रमी दानव शूल और पट्टिश आदि हाथोंमें लिये मेरे सामने आये और मुझपर शूल तथा भुशुण्डियोंका प्रहार करने लगे
ācchādya rathapanthānam utkrōśanto mahārathāḥ | āvṛtya sarvatas te māṃ śaravarṣaravākiran ||
वे महारथी दानव मेरे रथ का मार्ग रोककर, भीषण गर्जना करते हुए, मुझे चारों ओर से घेरकर बाणों की वर्षा से ढक देने लगे।
अजुन उवाच