युधिछिर उवाच साहसाद् यदि वा मोहाद् भीम पापमिदं कृतम् | नैतत् ते सदृशं वीर मुनेरिव मृषा वध:,युधिष्ठिर बोले--वीर भीमसेन! तुमने दुःसाहसवश अथवा मोहके कारण जो यह पापकर्म किया है, वह मुनिवृत्तिसे रहनेवाले तुम्हारे अनुरूप नहीं है। राक्षसोंका यह संहार व्यर्थ ही किया गया है
युधिष्ठिर बोले—वीर भीमसेन! तुमने दुःसाहसवश अथवा मोह के कारण जो यह पापकर्म किया है, वह मुनिवृत्ति से रहने वाले तुम्हारे अनुरूप नहीं है। राक्षसों का यह संहार व्यर्थ ही किया गया है।
युधिछिर उवाच