अर्जुनागमनम्
Arjuna’s Arrival and Reunion on the Sacred Mountain
सो5तिविद्धो महेष्वास: शक्त्यामितपराक्रम: । गदां जग्राह कौन्तेय: क्रोधपर्याकुलेक्षण:,तरसा चाभिदुद्राव मणिमन्तं महाबलम् | शक्तिकी गहरी चोट लगनेसे महान धनुर्धर एवं अत्यन्त पराक्रमी कुन्तीकुमार भीमके नेत्र क्रोधसे व्याकूल हो उठे और उन्होंने एक ऐसी गदा हाथमें ली जो शत्रुओंका भय बढ़ानेवाली थी। उसके ऊपर सोनेके पत्र जड़े थे। वह सारी-की-सारी लोहेकी बनी हुई और शत्रुओंको नष्ट करनेमें समर्थ थी। उसे लेकर भीमसेन विकट गर्जना करते हुए बड़े वेगसे महाबली मणिमान्की ओर दौड़े
so ’tividdho maheṣvāsaḥ śaktyāmitaparākramaḥ | gadāṃ jagrāha kaunteyaḥ krodhaparyākulekṣaṇaḥ || tarasā cābhidudrāva maṇimantaṃ mahābalam |
शक्ति की गहरी चोट से अतिविद्ध होकर भी, महान धनुर्धर और अमित पराक्रमी कौन्तेय भीम की आँखें क्रोध से व्याकुल हो उठीं। उन्होंने गदा उठा ली और वेग से महाबली मणिमान् की ओर दौड़ पड़े।
वैशम्पायन उवाच