अर्जुनागमनम्
Arjuna’s Arrival and Reunion on the Sacred Mountain
न ग्लानिर्न च कातर्य न वैक्लव्यं न मत्सर: । कदाचिज्जुषते पार्थमात्मजं मातरिश्वन:,वायु-पुत्र कुन्तीकुमार भीमसेनको कभी ग्लानि, कातरता, व्याकुलता और मत्सरता आदि भाव नहीं छूते थे
na glānir na ca kātaryaṁ na vaiklavyaṁ na matsaraḥ | kadācij juṣate pārtham ātmajaṁ mātariśvanaḥ ||
मातरिश्वा (वायु) के पुत्र, पार्थ के आत्मज भीम में कभी ग्लानि, कायरता, व्याकुलता या मत्सर नहीं टिकते थे।
वैशम्पायन उवाच