Kubera’s Fivefold Nīti and Protection of the Pāṇḍavas (वैश्रवणोपदेशः)
शशलोहितवर्णाभा: क्वचिद्गैरिकधातव: । सितासिताभ्रप्रतिमा बालसूर्यसमप्र भा:,“कहीं गेरु नामक धातु हैं, जिनकी कान्ति लाल खरगोशके समान दिखायी देती है। कोई धातु श्वेत बादलोंके समान हैं, तो कोई काले मेघोंके समान। कोई प्रातःकालके सूर्यकी भाँति लाल रंगके हैं
śaśalohitavarṇābhāḥ kvacid gairikadhātavaḥ | sitāsitābhrapratimā bālasūryasamaprabhāḥ ||
वैशम्पायन बोले—कहीं गैरिक (गेरु) की धातुएँ हैं, जिनकी आभा लाल खरगोश के रंग-सी है। कहीं वे श्वेत बादलों के समान हैं, कहीं काले मेघों के समान; और कहीं प्रातःकाल के बाल-सूर्य की भाँति अरुण तेज से चमकती हैं।
वैशम्पायन उवाच