Kubera’s Fivefold Nīti and Protection of the Pāṇḍavas (वैश्रवणोपदेशः)
इति श्रीमहाभारते आरण्यके पर्वणि यक्षयुद्धपर्वणि गन्धमादनप्रवेशे अष्टपपञज्चाशदधिकशततमो< ध्याय:,इस प्रकार श्रीमह्याभारत वनपर्वके अन्तर्गत यक्षयुद्धपर्वमें गन््धमादनप्रवेशविषयक एक सौ अद्वावनवाँ अध्याय पूरा हुआ
iti śrīmahābhārate āraṇyake parvaṇi yakṣayuddhaparvaṇi gandhamādanapraveśe aṣṭapañcāśad-adhika-śatatamo 'dhyāyaḥ |
इस प्रकार श्रीमहाभारत के वनपर्व के आरण्यक-भाग में, यक्षयुद्ध-प्रसंग के अंतर्गत, गन्धमादन-प्रवेशविषयक अध्याय समाप्त हुआ। यह उपसंहार कथा-प्रवाह में एक मोड़ का संकेत देता है—जहाँ वन में अमानवीय प्राणियों से साक्षात्कार के द्वारा संयम, साहस और धर्मपालन की परीक्षा होती है।
वैशग्पायन उवाच