Kubera’s Arrival and the Disclosure of Agastya’s Curse
Vaiśaṃpāyana–Janamejaya Narrative
मुहुर्मुहुव्याददान: सृक्किणी परिसंलिहन् | अभिदुद्राव संरब्धो बलिव॑ज़धरं यथा,राक्षसके ऐसा कहनेपर भीमसेन अपने मुखके दोनों कोने चाटते हुए कुछ मुसकराते-से प्रतीत हुए फिर क्रोधसे साक्षात् काल और यमराजके समान जान पड़ने लगे। रोषसे उनकी आँखें लाल हो गयी थीं “खड़ा रह,” खड़ा रह कहते हुए ताल ठोंककर राक्षसकी ओर दृष्टि गड़ाये उसपर टूट पड़े। राक्षस भी उस समय भीमसेनको युद्धके लिये उपस्थित देख बार- बार मुँह फैलाकर मुँहके दोनों कोने चाटने लगा और जैसे बलिराजा वज्रधारी इन्द्रपर आक्रमण करता है, उसी प्रकार कुपित हो उसने भीमसेनपर धावा किया
vaiśampāyana uvāca | muhur muhur vyādadānaḥ sṛkkiṇī pariṃlihan | abhidudrāva saṃrabdho balir vajradharaṃ yathā |
वैशम्पायन बोले— राक्षस बार-बार मुँह फैलाकर और होंठों के कोने चाटता हुआ क्रोध से उन्मत्त होकर आगे बढ़ा। जैसे कभी बलिराज वज्रधारी इन्द्र पर टूट पड़ा था, वैसे ही वह भीमसेन पर वेग से झपटा।
वैशम्पायन उवाच