Rājarṣi-samāgamaḥ — Yudhiṣṭhirasya Dharma-parīkṣā ca
Meeting the Royal Sage and a Dharmic Audit
प्रजासंक्षेपसमये दण्डहस्तमिवान्तकम् । त॑ं दृष्टवा धर्मराजस्तु परिष्वज्य पुन: पुन:,उन्हें देखकर ऐसा प्रतीत होता था, मानो प्रजाके संहारकालमें दण्ड हाथमें लिये यमराज खड़े हों। भीमसेनको उस अवस्थामें देखकर धर्मराजने उन्हें बार-बार हृदयसे लगाया
prajāsaṃkṣepasamaye daṇḍahastam ivāntakam | taṃ dṛṣṭvā dharmarājas tu pariṣvajya punaḥ punaḥ |
प्रजाओं के संहार-काल में दण्ड हाथ में लिए यमराज जैसे वह प्रतीत होता था। उसे उस दशा में देखकर धर्मराज युधिष्ठिर ने उसे बार-बार हृदय से लगा लिया।
वैशम्पायन उवाच