Kuberasaras-darśana (Bhīma beholds Kubera’s guarded lotus-lake) / कुबेरसरः-दर्शनम्
बुद्धया स्वप्रतिपन्नेषु कुर्यात् साधुष्वनुग्रहम् । निग्रहं चाप्यशिष्टेषु निर्मर्यादेषु कारयेत्,बुद्धिसे सोच-विचारकर अपनी शरणमें आये हुए श्रेष्ठ कर्म करनेवाले पुरुषोंपर अनुग्रह करना चाहिये और मर्यादा भंग करनेवाले दुष्ट पुरुषोंको दण्ड देना चाहिये
बुद्धि से विचार करके जो अपनी शरण में आए हुए सदाचारी और श्रेष्ठ कर्म करने वाले हों, उन पर अनुग्रह करना चाहिए; और जो अशिष्ट, दुष्ट तथा मर्यादा-भंग करने वाले हों, उनका निग्रह करके दण्ड कराना चाहिए।
वैशम्पायन उवाच