Kuberasaras-darśana (Bhīma beholds Kubera’s guarded lotus-lake) / कुबेरसरः-दर्शनम्
वृद्ध: सम्मन्त्रय सद्धिश्व बुद्धिमद्धि: श्रुतान्वितै: । आस्थित: शास्ति दण्डेन व्यसनी परिभूयते,वेद-शास्त्रोंके विद्वान, बुद्धिमान् तथा बड़े-बूढ़े श्रेष्ठ पुरुषोंस सलाह करके उनका कृपापात्र बना हुआ राजा ही दण्डनीतिके द्वारा शासन कर सकता है। जो राजा दुर्व्यसनोंमें आसक्त होता है, उसका पराभव हो जाता है
vṛddhaiḥ sammantrya saddhiś ca buddhimadbhiḥ śrutānvitaiḥ | āsthitaḥ śāsti daṇḍena vyasanī paribhūyate ||
वैशम्पायन बोले—वेद-शास्त्रों के ज्ञाता, बुद्धिमान और वृद्ध श्रेष्ठ पुरुषों से परामर्श करके, उनकी आज्ञा में दृढ़ स्थित राजा ही दण्डनीति द्वारा शासन कर सकता है; पर जो राजा विनाशकारी व्यसनों में आसक्त होता है, वह अपमानित होकर पराजय को प्राप्त होता है।
वैशम्पायन उवाच