Kuberasaras-darśana (Bhīma beholds Kubera’s guarded lotus-lake) / कुबेरसरः-दर्शनम्
वेदाचारविधानोक्तिर्यज्नैर्धार्यन्ति देवता: । बृहस्पत्युशन:प्रोक्तैर्नयैर्धार्यन्ति मानवा:,वेदोक्त आचारके विधानसे बतलाये हुए यज्ञोंद्वारा देवतवाओंकी आजीविका चलती है और बृहस्पति तथा शुक्राचार्यकी कही हुई नीतियाँ मनुष्योंके जीवन-निर्वाहकी आधारभूमि हैं
वेदोक्त आचार-विधान के अनुसार किए गए यज्ञों से देवताओं का धारण-पोषण होता है; और बृहस्पति तथा उशनस् (शुक्राचार्य) द्वारा कहे गए नय-नीतियों से मनुष्यों का जीवन-निर्वाह और व्यवस्था चलती है।
वैशम्पायन उवाच