Hanūmān’s Embrace, Counsel, and Promise to Amplify Bhīma’s Battle-Roar
Gandhamādana Continuation
सत्यात् प्रच्यवमानानां व्याधयो बहवो5भवन् । कामाश्षोपद्रवाश्वैव तदा वै दैवकारिता:,सत्यसे भ्रष्ट होनेके कारण द्वापरके लोगोंमें अनेक प्रकारके रोग उत्पन्न हो जाते हैं। उनके मनमें अनेक प्रकारकी कामनाएँ पैदा होती हैं और वे बहुत-से दैवी उपद्रवोंसे भी पीड़ित हो जाते हैं
सत्य से च्युत होने के कारण द्वापर के लोगों में अनेक रोग उत्पन्न हो गए। उनके भीतर अनेक कामनाएँ उठीं और वे दैवी उपद्रवों से भी पीड़ित होने लगे।
भीम उवाच