Kṛṣṇasya asāṃnidhya-kāraṇaṃ — Śālva–Soubha-vṛttāntaḥ
Why Kṛṣṇa was absent; the Śālva and Saubha account
प्रकृत्या विषम दुर्ग प्रकृत्या च सुरक्षितम् । प्रकृत्या चायुधोपेतं विशेषेण तदानघ,निष्पाप नरेश! द्वारका एक तो स्वभावसे ही दुर्गम्य, सुरक्षित और अस्त्र-शस्त्रोंसे सम्पन्न है, तथापि उस समय इसकी विशेष व्यवस्था कर दी गयी थी
prakṛtyā viṣamaṃ durgaṃ prakṛtyā ca surakṣitam | prakṛtyā cāyudhopetaṃ viśeṣeṇa tadānagha niṣpāpa nareśa |
वायु ने कहा—“निष्पाप नरेश! द्वारका स्वभाव से ही दुर्गम, स्वभाव से ही सुरक्षित और स्वभाव से ही अस्त्र-शस्त्रों से सम्पन्न है; फिर भी उस समय उसकी रक्षा के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी।”
वायुदेव उवाच