Bhīmasena–Hanūmān Saṃvāda: The Tail Test and the Divine Path
उन्मूलयन् महावृक्षान् पोथयंस्तरसा बली । लतावललीश्व वेगेन विकर्षन् पाण्डुनन्दन: । उपर्युपरि शैलाग्रमारुरुक्षुरिव द्विप:,द्रौपदीका अनुरोधपूर्ण वचन ही उनका पाथेय (मार्गका कलेवा) था, वे उसीको लेकर शीघ्रतापूर्वक चले जा रहे थे। वायुके समान वेगशाली वृकोदर पर्वकालमें होनेवाले उत्पात (भूकम्प और बिजली गिरने)-के समान अपने पैरोंकी धमकसे पृथ्वीको कम्पित और हाथियोंके समूहोंको आतंकित करते हुए चलने लगे। वे महाबली कुन्तीकुमार सिंहों, व्याप्रों और मृगोंको कुचलते तथा अपने वेगसे बड़े-बड़े वृक्षोंको जड़से उखाड़ते और विनाश करते हुए आगे बढ़ने लगे। पाण्डुनन्दन भीम अपने वेगसे लताओं और बल्लरियोंको खींचे लिये जाते थे। वे ऊपर-ऊपर जाते हुए ऐसे प्रतीत होते थे, मानो कोई गजराज पर्वतकी सबसे ऊँची चोटीपर चढ़ना चाहता हो
unmūlayan mahāvṛkṣān pothayaṁstarasā balī | latāvallīśca vegena vikarṣan pāṇḍunandanaḥ | uparyupari śailāgrāmārurukṣuriva dvipaḥ ||
वैशम्पायन बोले— पाण्डुनन्दन बलवान् भीम प्रचण्ड वेग से आगे बढ़ा—महावृक्षों को जड़ से उखाड़ता और उन्हें चूर-चूर करता हुआ। अपने वेग में वह लताओं और बल्लरियों को भी घसीट ले जाता था। वह ऐसा प्रतीत होता था मानो कोई गजराज पर्वत की सर्वोच्च चोटी पर चढ़ने को उद्यत हो।
वैशम्पायन उवाच