द्रौपदीश्रमः तथा घटोत्कचस्मरणम्
Draupadī’s Exhaustion and the Summoning of Ghaṭotkaca
प्रविशत्स्वथ वीरेषु पर्वतं गन्धमादनम् | चण्डवातं महद् वर्ष प्रादुरासीद् विशाम्पते,राजन! वीर पाण्डवोंके गन्धमादन पर्वतपर पदार्पण करते ही प्रचण्ड आँधीके साथ बड़े जोरकी वर्षा होने लगी
praviśatsv atha vīreṣu parvataṁ gandhamādanam | caṇḍavātaṁ mahad varṣa prādurāsīd viśāmpate, rājan |
वैशम्पायन बोले— राजन! वीरों के गन्धमादन पर्वत में प्रवेश करते ही प्रचण्ड वायु चली और उसके साथ मूसलाधार वर्षा प्रकट हो उठी।
वैशम्पायन उवाच