Gaṅgā-Tīrtha Darśana and the Prelude to the Yavakrīta–Indra Exemplum (लोमश-युधिष्ठिर संवादः)
कहोड उवाच इत्यर्थमिच्छन्ति सुताञउ्जना जनक कर्मणा । यदहं नाशकं कर्तु तत् पुत्र: कृतवान् मम,उस समय कहोडने कहा--जनकराज! लोग इसीलिये अच्छे कर्मोद्वारा पुत्र पानेकी इच्छा रखते हैं, क्योंकि जो कार्य मैं नहीं कर सका, उसे मेरे पुत्रने कर दिखाया
kahoḍa uvāca—ity artham icchanti sutān janā janaka karmaṇā | yad ahaṁ nāśakaṁ kartuṁ tat putraḥ kṛtavān mama ||
कहोड ने कहा—जनकराज! लोग इसी कारण सत्कर्मों द्वारा पुत्र की कामना करते हैं, क्योंकि जो कार्य मैं न कर सका, उसे मेरे पुत्र ने कर दिखाया।
कहोड उवाच