मान्धातृ-जन्म-चरितम्
The Birth and Career Account of Māndhātṛ
तत्पश्चात् तपोधन च्यवन मुनिके सहित सब मुनि जाग उठे। उन सबने उस कलशको जलसे शून्य देखा ।। कस्य कर्मेदमिति ते पर्यपृच्छन् समागता: । युवनाश्वो ममेत्येवं सत्यं समभिपद्यत,फिर तो वे सब एकत्र हो गये और एक-दूसरेसे पूछने लगे--“यह किसका कर्म है?' युवनाश्वने सामने आकर कहा--“यह मेरा ही कर्म है।' इस प्रकार उन्होंने सत्यको स्वीकार कर लिया
kasya karmedam iti te paryapṛcchan samāgatāḥ | yuvanāśvo mamety evaṃ satyaṃ samabhipadyata ||
इसके बाद तपोधन च्यवन मुनि के साथ सब मुनि जाग उठे। उन्होंने उस कलश को जल से शून्य देखा और एकत्र होकर परस्पर पूछने लगे—“यह किसका कर्म है?” तब युवनाश्व आगे बढ़कर सत्यपूर्वक बोला—“यह मेरा ही कर्म है।” इस प्रकार सबने सत्य को स्वीकार कर लिया।
लोमश उवाच