Kirmīra-rākṣasa-saṃgamaḥ (Encounter and Slaying of Kirmīra) | किर्मीरेण सह भीमसेनसमागमः
इत्युक्त्वा प्रारुदत् कृष्णा मुखं प्रच्छाद्य पाणिना । पद्मकोशप्रकाशेन मृदुना मृदुभाषिणी,ऐसा कहकर मृदुभाषिणी द्रौपदी कमलकोशके समान कान्तिमान् एवं कोमल हाथसे अपना मुँह ढककर फूट-फ़ूटकर रोने लगी
ity uktvā prārudat kṛṣṇā mukhaṁ pracchādya pāṇinā | padmakośaprakāśena mṛdunā mṛdubhāṣiṇī ||
ऐसा कहकर मृदुभाषिणी कृष्णा (द्रौपदी) ने कमल-कोष के समान कान्तिमान् अपने कोमल हाथ से मुख ढक लिया और फूट-फूटकर रो पड़ी।
राक्षस उवाच