Akṛtavraṇa’s Account Begins: Gādhi–Satyavatī–Ṛcīka and the Bhārgava Lineage Prelude
एवमस्त्विति सा तेन पाण्डव प्रतिनन्दिता । जमदर्ग्निं ततः पुत्र॑ं जज्ञे सा काल आगते,पाण्डुनन्दन! तब 'एवमस्तु” कहकर भृगुजीने अपनी पुत्रवधूका अभिनन्दन किया। तत्पश्चात् प्ररवका समय आनेपर सत्यवतीने जमदग्निनामक पुत्रको जन्म दिया
evam astv iti sā tena pāṇḍava pratinanditā | jamadagnim tataḥ putraṁ jajñe sā kāla āgate pāṇḍunandana ||
“एवमस्तु” कहकर उन्होंने, हे पाण्डुनन्दन, अपनी पुत्रवधू का अभिनन्दन किया। फिर समय आने पर सत्यवती ने जमदग्नि नामक पुत्र को जन्म दिया।
अकृतव्रण उवाच