मैत्रेयागमनम् — The Arrival of Maitreya and the Admonition to Duryodhana
तावन्योन्यं समा श्लिष्य प्रकर्षन्तौ परस्परम् | उभावपि चकाशे ते प्रवृद्धौ वृषभाविव,वे दोनों वीर परस्पर भिड़ गये और दोनों दोनोंको खींचने लगे। दो हृष्ट-पुष्ट साँड़ोंकी भाँति परस्पर भिड़े हुए उन दोनों योद्धाओंकी बड़ी शोभा हो रही थी
tāv anyonyaṃ samāśliṣya prakarṣantau parasparam | ubhāv api cakāśe te pravṛddhau vṛṣabhāv iva ||
वे दोनों परस्पर आलिंगन-सा करके भिड़ गये और एक-दूसरे को बलपूर्वक खींचने लगे। दो हृष्ट-पुष्ट वृषभों की भाँति वे दोनों योद्धा उस संघर्ष में दीप्तिमान प्रतीत हो रहे थे।
विदुर उवाच