मैत्रेयागमनम् — The Arrival of Maitreya and the Admonition to Duryodhana
तस्मिन् क्षणेडथ प्रववो मारुतो भूशदारुण: । रजसा संवृतं तेन नष्टज्योतिरभून्नरभ:,इसी समय बड़ी प्रचण्ड वायु चलने लगी। उसकी उड़ायी हुई धूलसे आच्छादित हो आकाशके तारे भी अस्त हो गये-से जान पड़ते थे
tasmin kṣaṇe ’tha pravavo māruto bhūśadāruṇaḥ | rajasā saṃvṛtaṃ tena naṣṭajyotir abhūn nabhaḥ ||
उसी क्षण पृथ्वी को दहला देने वाली प्रचण्ड वायु चल पड़ी। उसके उड़ाए हुए रजकणों से आच्छादित होकर आकाश का प्रकाश मानो नष्ट हो गया—जैसे तारे भी ढँक गए हों।
विदुर उवाच