Hemakūṭa’s Marvels and Lomaśa’s Account of Ṛṣabha at Ṛṣabhakūṭa
Nandā–Kauśikī Tīrtha Passage
पूरणार्थ समुद्रस्य पृथिवीमवतारिता । (कालेयाश्न यथा राजंस्त्रिदशैर्विनिपातिता:) समुद्रश्न यथा पीत: कारणार्थ महात्मना,महाराज! समुद्रको भरनेके लिये ही गंगा पृथ्वीपर उतारी गयी थी। राजन्! देवताओं ने कालेय नामक दैत्योंको जिस प्रकार मार गिराया और कारणवश महात्मा अगस्त्यने जिस प्रकार समुद्र पी लिया तथा उन्होंने ब्राह्मणोंकी हत्या करनेवाले वातापि नामक दैत्यको जिस प्रकार नष्ट किया, वह सब प्रसंग, जिसके विषयमें तुमने पूछा था, मैंने बता दिया
pūraṇārthaṃ samudrasya pṛthivīm avatāritā | kāleyāś ca yathā rājan tridśair vinipātitāḥ || samudraś ca yathā pītaḥ kāraṇārthaṃ mahātmanā | mahārāja ||
लोमश ने कहा—महाराज! समुद्र को भरने के लिए ही गंगा पृथ्वी पर उतारी गई थी। और राजन्! जैसा तुमने पूछा था, देवताओं ने कालेय दैत्यों को जिस प्रकार मार गिराया तथा किसी कारणवश महात्मा अगस्त्य ने जिस प्रकार समुद्र पी लिया—वह सब भी मैंने तुम्हें बता दिया।
लोगश उवाच