Sagara’s Aśvamedha Horse Lost; The Sixty-Thousand Sons Begin the Subterranean Search
Kapila Introduced
एतावदुक्त्वा वचन मैत्रावरुणिरच्युत: । समुद्रमपिबत् क्रुद्ध: सर्वलोकस्य पश्यत:,अपनी मर्यादासे कभी च्युत न होनेवाले मित्रा-वरुण-कुमार अगस्त्यजी कुपित हो सब लोगोंके देखते-देखते समुद्रको पीने लगे
etāvad uktvā vacanaṃ maitrāvaruṇir acyutaḥ | samudram apibat kruddhaḥ sarvalokasya paśyataḥ ||
इतना कहकर, अपनी मर्यादा से कभी न च्युत होने वाले मित्र-वरुण-कुमार अगस्त्य क्रुद्ध हो उठे और समस्त लोकों के देखते-देखते समुद्र को पीने लगे।
लोगश उवाच