Sagara’s Aśvamedha Horse Lost; The Sixty-Thousand Sons Begin the Subterranean Search
Kapila Introduced
पूरणार्थ समुद्रस्य भवद्धिर्यत्नमास्थितै: । एतच्छुत्वा तु वचन महर्षेभावितात्मन:,उनके ऐसा कहनेपर मुनिप्रवर भगवान् अगस्त्यने वहाँ एकत्र हुए इन्द्र आदि समस्त देवताओंसे उस समय यों कहा--'देवगण! वह जल तो मैंने पचा लिया, अतः समुद्रको भरनेके लिये सतत प्रयत्नशील रहकर आपलोग कोई दूसरा ही उपाय सोचें।” शुद्ध अन्तःकरणवाले महर्षिका यह वचन सुनकर सब देवता बड़े विस्मित हो गये; उनके मनमें विषाद छा गया। वे आपसमें सलाह करके मुनिवर अगस्त्यजीको प्रणाम कर वहाँसे चल दिये
pūraṇārthaṃ samudrasya bhavadbhir yatnam āsthitaiḥ | etac chrutvā tu vacanaṃ maharṣeḥ bhāvitātmanaḥ ||
लोमश ने कहा— “समुद्र को भरने के लिए आप लोग यत्न में लगे हैं; अब भी प्रयत्न करते रहें, परन्तु कोई दूसरा उपाय सोचें।” भावितात्मा महर्षि का यह वचन सुनकर देवता विस्मित हो गए और विषाद में डूब गए। फिर वे आपस में परामर्श करके मुनिवर अगस्त्य को प्रणाम कर वहाँ से चले गए।
लोगश उवाच