Kāleya-Āśrama-Vināśaḥ — The Kāleyas’ nocturnal raids and the devas’ supplication to Nārāyaṇa
स एवमुकक्त्वा द्विपदां वरिष्ठ: प्राणान् वशी स्वान् सहसोत्ससर्ज | ततः सुरास्ते जगृहुः परासो- रस्थीनि तस्याथ यथोपदेशम्,ऐसा कहकर मनुष्योंमें श्रेष्ठ, जितेन्द्रिय महर्षि दधीचने सहसा अपने प्राणोंका त्याग कर दिया। तब देवताओंने ब्रह्माजीके उपदेशके अनुसार महर्षिके निर्जीव शरीरसे हड्डियाँ ले लीं
sa evam uktvā dvipadāṁ variṣṭhaḥ prāṇān vaśī svān sahasotsasarja | tataḥ surās te jagṛhuḥ parāsoḥ asthīni tasyātha yathopadeśam ||
ऐसा कहकर मनुष्यों में श्रेष्ठ, जितेन्द्रिय महर्षि दधीच ने सहसा अपने प्राणों का त्याग कर दिया। तब देवताओं ने ब्रह्माजी के उपदेश के अनुसार महर्षि के निर्जीव शरीर से उनकी अस्थियाँ ले लीं।
लोगमश उवाच