Kāleya-Āśrama-Vināśaḥ — The Kāleyas’ nocturnal raids and the devas’ supplication to Nārāyaṇa
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ३ श्लोक मिलाकर कुल ७४ श्लोक हैं) अऑरड..2 #९23. | हि २ 7 शततमो< ध्याय: वृत्रासुरसे त्रस््त देवताओंको महर्षि दधीचका अस्थिदान एवं वज्रका निर्माण युधिछिर उवाच भूय एवाहमिच्छामि महर्षेस्तस्य धीमत: । कर्मणां विस्तरं श्रोतुमगस्त्यस्य द्विजोत्तम,युधिष्ठिरने कहा-दद्विजश्रेष्ठ! मैं पुनः बुद्धिमान् महर्षि अगस्त्यजीके चरित्रका विस्तारपूर्वक वर्णन सुनना चाहता हूँ
yudhiṣṭhira uvāca | bhūya evāham icchāmi maharṣes tasya dhīmataḥ | karmaṇāṁ vistaraṁ śrotum agastyasya dvijottama ||
युधिष्ठिर ने कहा—हे द्विजश्रेष्ठ! मैं पुनः उस बुद्धिमान महर्षि अगस्त्य के कर्मों का विस्तारपूर्वक वर्णन सुनना चाहता हूँ।
युधिछिर उवाच