कण्वोपदेशः—नश्वरबलविवेकः तथा मातलिगुणकेश्याः आख्यानारम्भः
Kaṇva’s Counsel on Impermanent Power; Opening of the Mātali–Guṇakeśī Narrative
मात्सर्याहंकृती चैव क्रमादेव उदाह्वता: । इन अस्त्रोंसे विद्ध होनेपर सभी मनुष्य मृत्युको प्राप्त होते हैं। काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मान, मात्सर्य और अहंकार--ये क्रमश: आठ दोष बताये गये हैं, जिनके प्रतीकस्वरूप उपयुक्त आठ अस्त्र हैं
mātsaryāhaṅkṛtī caiva kramād eva udāhṛtāḥ | etair astraiḥ viddhaḥ sarvo manuṣyo mṛtyuṃ prāpnoti | kāmaḥ krodho lobho moho madaḥ mānaḥ mātsaryaṃ ca ahaṅkāraś ca—ete kramāśaḥ aṣṭau doṣāḥ proktāḥ, yeṣāṃ pratikasvarūpāṇi uktāni aṣṭau astrāṇi |
मात्सर्य और अहंकार भी क्रम से कहे गये हैं। इन अस्त्रों से विद्ध होने पर प्रत्येक मनुष्य मृत्यु को प्राप्त होता है। काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मान, मात्सर्य और अहंकार—ये क्रमशः आठ दोष बताए गए हैं; और उक्त आठ अस्त्र उनके प्रतीक हैं।
राम उवाच